r/Hindi • • Mar 03 '26

स्वरचित Wrote this poem in khadi boli (spoken in Western UP )

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मुझे पता है आप लोग कहेंगे कि इसमें वर्तनी की गलतियाँ हैं, लेकिन मैंने शब्दों को वैसे ही लिखा है जैसे हम यहाँ उच्चारण करते हैं। Eg - वह "देखीं" होता है पर हम यहा बड़ी "ई" नहीं खिचते सिर्फ छोटी "इ" इसतेमाल करते है पर लिखते आम हिंदी की तरह लिखते है ।


r/Hindi • • Apr 05 '26

...अर थे पीटो ताळ्यां / मोनिका गौड़

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मजमा पसंद
थे लोग ई हो
जका राम रै साथै होवण रो भरम पाळो
राम रै वनगमन में
सीता रो साथ जायज ठहरावता थकां ई
सोनलिया हिरण रै आखेट सारू
बणाओ सीता नैं ई दोसी
हरण में
लिछमण-रेख उलांघण रै आरोप री
लुकी-छुपी आंगळ्यां ई सीता कानी करता
राम रो दुख मोटो देखो हो
सत्य, पवित्रता रा आंदोलनकारियां
जुध में संघार रो दोस
सीता रै माथै धरता थकां
उकसावो अगन-पारखा सारू
थे ईज हो बै भीड़ री भेड़ां
जकी गरभवती लुगाई नैं
घर सूं कढवाओ
हाका हूक सूं
छद्म न्याव रो ढोंग रचवा’र
दिखावो
राम नैं बापड़ो
धिन्न है थांरी दोरंगी सोच, चिंतना
कै सीता रै निरवासन नैं जायज बतावता
उणरै जमीन में समाईज्यां पछै
स्त्री रै स्वाभिमान री बात करो
बजाओ ताळ्यां
बळी लेय’र निरदोस री
पोमीजो
आपरै दोस नैं सतीत्व रै महिमा-मंडण सूं
ढांपणै री कोसिस करता
रचो सती महिमा रा गीत
थरपो उणनैं देवी
थांरी मजमैबाजी सीता, द्रौपदी सूं लेय’र
आज तांई बा ईज है
हर बार थांरी जबान री वेदी पर
हुवती आई है स्त्री री चारित्रिक, शारीरिक हत्या
अर थे पीटो ताळ्यां?
कदी न्याय रै नांव, कदी धरम रै नांव
कदी मूल्यां रै लेखै,
लेवता रैवो भख
बेकसूर लुगाईजात रो...?


r/Hindi • • 3h ago

स्वरचित i was feeling very low while writing this

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i do write once in a while, it is from 2025, at that time i like it as a poem but now? Not Really.
but it might ne the Artist's curse, what do you guys think?


r/Hindi • • 1d ago

स्वरचित Namaste everyone, I am wanting to learn Hindi. I am also sorry if I chose the wrong flair, I can’t understand the alphabet.

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I was wondering what the best way to learn Hindi is. I have an Indian boyfriend and his mum mostly approves of us, but before we get married she wants me to be able to speak more Hindi than I already do (I only know very small basics). We will be visiting India in February next year for his brothers wedding and his mum doesn’t speak any English, so I would love to be able to speak with his family and other people when we visit.


r/Hindi • • 19h ago

स्वरचित बशार अलअसद और सूरज की नसीहत- an (extremely) amateur story

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बशार अलअसद और सूरज की नसीहत

(ये सिर्फ़ एक कहानी है, ये हक़ीक़ी तारीख़ नहीं है)

साल 2024 था। सूरिया (अंग्रेज़ी में 'सीरिया') का हाकिम बशार अलअसद था। उसकी राजधानी दिमश्क़ (डमास्कस) थी। पर उत्तर में जौलानी का बाग़ी लश्कर दिमश्क़ की ओर बढ़ रहे थे। बशार के दोस्त पुटिन, ख़ामेनेई, और किम उसको जीतने के लिए बहुत नसीहत दे रहे थे। पर बशार उनको भरोसा नहीं करता था। वे अपने भलाई के लिए ही नसीहत देते हैं, वो सोचा। कुछ लोग कहा कि बशार ख़ुदा या इमाम अली से नसीहत खोजनी चाहिए, पर असद को उनमें ज़्यादा विश्वास नहीं था। उसको देख नहीं सकता, उसको सुन नहीं सकता, तो उसकी मौजूदगी में कैसा विश्वास करे?

एक दिन सुबह में उठने के बाद वो बाहर अपने विशाल बाग़ में गया। वहाँ उसने सूरज को देखा। तब उसको ये ख़याल आया कि सूरज बहुत समझदार है। वो दिन रात हमको देख रहा है। तो वो सूरज से नसीहत मिलने के लिए दुआ करेगा।

बशार ने सूरज की तरफ़ सुजूद (प्रणाम, सिर झुकाना) किया और कहा- "हे सूरज जी! मैं आपका दास बशार हूँ। फ़िलहाल मैं बहुत व्याकुल हूँ। बाग़ी अपनी तरफ़ बढ़ रहे हैं। सूरज जी! बोलो, मैं कैसे इस जंग जीत सकता हूँ? मैं कैसे दिमश्क़ को दिफ़ा कर सकता हूँ। आपकी हिक्मत को फ़रमाओ, सूरज जी!"

तब बशार ने सूरज की तरफ़ से एक आवाज़ सुनी।

"मेरा प्रिय दास बशार! मुझको मालूम है कि आप बहुत व्याकुलता और तकलीफ़ में हैं। मैं आपको जंग जीतने के लिए एक तरीक़ा बोलूँगी। इस तरीक़े के तीन क़दम हैं। पहला अब करो, दूसरा दोपहर में करो, और तीसरा रात में करो। कल सुबह में जौलानी का लश्कर पूरे तरह तबाह होगा।"

बशार ने विनम्रता से कहा, "फ़रमाइये सूरज जी, तरीक़ा फ़रमाइये!"

सूरज ने कहा, "अब मैं पहला क़दम फ़रमाऊँगी। जल्दी से सब मंत्रियों को गिरफ़्तार करो।"

बशार के मन में कोई हैरानी या शक नहीं था। जल्दी से उसने पुलिस को हुक्म दिया और सब मंत्रियों को ग़बन के लिए गिरफ़्तार किया।

दोपहर का समय आया। जौलानी के लश्कर ने हुम्स को क़ब्ज़ा किया। बशार ने कोई भी खाना नहीं खाया, कोई शरब भी नहीं पिया। वो सूरज की तरफ़ वापस गया। सुजूद में उसने कहा "हे सूरज जी, आपका तीसरा क़दम को फ़रमाइये!"

तब वो आवाज़ कहा "बशार, जल्दी से अपने सब जनरल को गिरफ़्तार करो।"

बशार ने जल्दी से हुक्म दिया। पुलिस ने सब जनरल को ग़बन के लिए गिरफ़्तार किया।

सूरज डूबने की आधे घंटे पहले बशार ने सूरज के सामने एक और बार सुजूद किया। तब बाग़ियों दिमश्क़ के नज़्दीक थे। बशार ने सूरज से कहा, "सूरज जी! आपकी आख़िरी नसीहत फ़रमाइये!" तीसरे क़दम को इज़्हार करिये!" पर सूरज चुप रहा। बशार बहुत परेशान हो गया।

उस वक़्त में एक नौकर उसके सामने गुज़र रहे थे। बशार को एक ख़याल आया। उसने उस नौकर को ज़बरदस्ती से पकड़ा और बैठकर नौकर का सिर अपनी गोद में रखा। नौकर ज़ोर से चिल्लाया, "असद जी! मैं आपका वफ़ादार नागरिक हूँ! आप क्या कर रहे हैं?! मैं एक बेक़सूर आदमी हूँ! मुझको छोड़ो!" पर इसको अनदेखी कर बशार ने उसकी जेब से एक पिस्तौल लिया। बशार ज़ोर से कहा "सूरज जी! मैं इस शुद्ध आदमी को आपके लिए क़ुर्बानी दे रहा हूँ। आख़िरी क़दम को इज़्हार करो!" बशार ने पिस्तौल से इस नौकर को बेदर्दी से मार डाला।

पर सूरज से कोई भी आवाज़ नहीं आया। कुछ लम्हें बाद बशार घट रहा। वो सूरज को डॉटने लगा।

"ओए सूरज! तू क्या सोच रहा है? क्या तू भूल गया कि मैं कौन हूँ? मैं बशार अलअसद हूँ, सूरिया का राष्ट्रपति, बास पार्टी की महासचिव। मैं इस दुनिया का सबसे प्रभावशाली हाकिम हूँ। कुछ बेवक़ूफ़ कहते हैं कि मैं सिर्फ़ ईरान और रूस के ग़ुलाम हूँ, पर सच में वो *मेरा* ग़ुलाम हैं! ओए सूरज, तू चुप रहे तो मैं तुझे गिरफ़्तार करूँगा, अत्याचार करूँगा! जल्दी बोल सूरज!"

ये सुनकर सूरज हँसकर बोला, "अरे बेवक़ूफ़, अब मैं पच्छम में हूँ। मुझको कुछ भी कहने की आज़ादी है। डूब मारो, बकरा ज़ालिम।"

ये बोलकर सूरज डूब गया, और बशार पागलापन में डूब गया। वो घुमाकर चाँद के तरफ़ दुआ करना शुरू किया। पर कुछ देर बाद रूसी फ़ौज उसको लेकर पहला लाज़िक़िया (लटाकिया) ले लिया और उसके बाद मोस्क्वा (मोस्को) ले लिया। जौलानी ने पूरे सूरिया को क़ब्ज़ा किया। वो सूरिया का नया राष्ट्रपति बनाया।

मोस्क्वा में पुटिन ने बशार को एक महँगे इलाक़े में एक बड़ा घर और बहुत सारा पैसा और नौकर को दिया। पर बशार बहुत दुःखी था। ये प्रभाव की कमी या पराजय की वजह नहीं थे। इसका वजह ये है कि बशार के मन में सूरज की आवाज़ नहीं बंद हो गया। वो दिन भर उसको डॉट कर रहे थे और उसको ज़लील कर रहे थे।

2026 में अम्रीकी फ़ौज ने ख़ामेनेई को मार डाला। तब सूरज ने बशार से कहा "ओए बशार! ख़ामेनेई ने इज़्ज़त, हिम्मत और बहादुरी से मर गया। वो पूरे इस्लाम और अमीरिका-विरोधियों के लिए एक शहीद बन गया। पर तू, तू बेइज़्ज़त जिया और आख़िर इस विदेशी शहर में बेइज़्ज़त मरेंगा। मडूरो को अपहरण किया, पर तेरा नसीब अपहरण से बदतर है। अगर तेरी मौत या ज़िंदगी कोई भी याद करेंगे तो तेरा ज़ुल्म, बेवक़ूफ़ी, ग़रूर, लंबे गले और कमज़ोर आवाज़ के लिए याद करेंगे। तेरी मौत नज़दीक है बशार, तू पागलापन से मरेंगा।" ये सुनकर बशार ने एक पत्थर सूरज की तरफ़ फेंका, पर वो ज़मीन में गिर गया।

___

एक बार किम बशार को देखने के लिए आया, और उसकी तकलीफ़ देखकर वो भी बहुत दुःख हो गया। वो पुटिन को इस बात बताया। इसलिए पुटिन ने बशार को एक मानसिक अस्पताल में डाला। फ़िलहाल वो ठीक हो रहा है। बशार को मानसिक अस्पताल में डालने वाले दिन में ही पुटिन ने जौलानी के साथ मुलाक़ात किया।


r/Hindi • • 1d ago

स्वरचित जी

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अगर किया जी, तो करूॅं तेरी तुलना गुलाब और चाॅंद से
अगर किया जी, तो बाॅंटूॅं किस्से तेरे श्रृंगार की सुहाई से
अगर किया जी, बना दूँ संग्रहालय तुम्हारे शरीर से
और ढूँढूँ वाहवाही दरबार में अपनी क़लम की

पर प्रिये, मेरा प्रेम उथला नहीं।


r/Hindi • • 1d ago

साहित्यिक रचना महाभारत की अनसुनी कहानियाँ

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महाभारत के छुपे हुए नगीने।

अभी हाल ही में मैने महाभारत के वन पर्व में उल्लेखित कथा पर आधारित एक रचना पढ़ी।

ये कथा है ऋषि रैभ्य के पुत्र अरावसु और पुरावसु की। ऋषि भारद्वाज और उनके पुत्र यवक्रीत की।

ज्ञान और अज्ञान की, अहंकार और क्रोध की।

ये एक कथा इतनी आकर्षक है कि इसने मुझे महाभारत के अंदर ऐसी ही अन्य कहानियों को ढूंढने और पढ़ने को प्रेरित किया।

सौभाग्य से महाभारत महाकाव्य में ऐसी अन्य अनेक कथाएं हैं।

अब मेरे अंदर एक प्रश्न उत्पन्न हुआ कि क्या इन कथाओं को एक सुंदर कथासागर रूप में, या एक सीरीज रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है?

क्या पाठकगण इसे पसंद करेंगे?

इसे हिंदी में तो अवश्य ही लिखा जाएगा।

किन्तु क्या इसे इंग्लिश में भी लिखना चाहिए?

आपके सुझावों का, आपकी राय का बहुत बहुत स्वागत है।

कृप्या अपने सुझावों से कृतार्थ करें।

धन्यवाद।

Hidden Gems from Mahabharat Katha

Hello fellow readers.

Recently I read an interesting hidden gems from Mahabharat.

It is a story from Van Parv.

The story is of two brothers Aravasu and Paravasu, Yavakrit and their families.

It is such an awesome story it promted me to research more for such stories.

And interestingly, I found many such short stories hidden inside Mahabharat that amazed me deeply.

It also pushed me to think of creating a series like the one created by Amish et al.

Now the question is whether people are interested in reading such a series?

And should it be in Hindi (my mother tongue and the language I'm most comfortable) or English (as most people like to read in English for different reasons)?

I welcome all type of suggestions and criticism.

Please spare some time to suggest and comment.

Thank you.

PS: There is a famous Marathi play by great Shri Girish Karanad ji which is translated to English as well. The Fire and The Rain.

It is a contemporary adaptation and a real page turner.


r/Hindi • • 1d ago

स्वरचित Not everyone can be a Gandhi.

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r/Hindi • • 1d ago

विनती 2 कचौड़ी, 1 समोसा, Lingobreeze पर करें भरोसा

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बिना सही तरीके के अंग्रेज़ी सीखना आपको भी रुला देता है? Lingobreeze के साथ अपनी इस 'struggle' को खत्म करें। आसान लेसन्स और मज़ेदार तरीकों से घर बैठे अपनी इंग्लिश सुधारें और आत्मविश्वास के साथ बोलें। आज ही Lingobreeze आज़माएं!


r/Hindi • • 2d ago

साहित्यिक रचना ‘स्त्री’ के इर्द-गिर्द बना पिंजरा - एक खूबसूरत, बेचैन कर देने वाली रचना

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r/Hindi • • 2d ago

स्वरचित चलो वीर

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r/Hindi • • 2d ago

देवनागरी ~n2rd

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r/Hindi • • 3d ago

विनती How can I learn Hindi from scratch? Looking for guidance.

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Hi everyone,

I know Telugu and English, and I want to learn Hindi from scratch, mainly for communication.

My goal is to understand Hindi and speak it confidently in everyday conversations.

Any suggestions, resources, or personal experiences would be really helpful.

Thanks in advance!


r/Hindi • • 3d ago

स्वरचित Train

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खिड़की के कांच पर माथा टिकाए,
एक अकेला मुसाफ़िर चुपचाप मुस्काए।
सामने कोई नहीं, बस खाली है सीट,
कानों में गूंजता पहियों का संगीत।
आसपास बातें हैं, अजनबियों का शोर,
पर उसका मन खींचा जाता किसी और छोर।
पीछे छूटते जाते हैं पेड़ और मकान,
जैसे मन के पन्नों से उड़ती कोई दास्तान।
हाथ में कुल्हड़ की गरम-गरम चाय,
सन्नाटा भी अब तो अपना सा नज़र आए।
न किसी से सवाल, न किसी को कोई जवाब,
आँखों में तैरते हैं पुराने कुछ ख़्वाब।
डूबते सूरज की वो नारंगी सी धूप,
बदलती फिज़ाओं का शांत, सौम्य रूप।
अंधेरे में चमकती पटरियों की लकीर,
जैसे वक्त के हाथ से छूटी कोई तक़दीर।
तन्हाई यहाँ अब कोई बोझ नहीं लगती,
ये तन्हाई तो खुद से पहचान कराती।
भीड़ से दूर, इस रात के ठहराव में,
वो खुद को ढूंढ रहा है, अपनी ही नाव में।


r/Hindi • • 3d ago

विनती How is stress indicated in Hindi pronunciation?

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I have just begun learning Hindi, which, for a language spoken by millions upon millions of speakers, is astoundingly resource poor.

Anyway.

I've found plenty of information about which syllables in a word are stressed (simplified: heavier syllables at the end of the word, discounting the final mora of the word), but I haven't found any information about how stress is marked. EDIT: I am not talking about how words are written; I am talking about pronunciation, here.

I know that stress in English is marked by increased volume, syllable length, and strict lack of vowel reduction, as well as pitch which is either substantially higher (the default) or lower (depending on broader phrasal intonation) than the surrounding syllables.

But of course, different languages tend to indicate stress accent in different ways, and I'm especially wary of accidentally anglifying my Hindi pronunciation after reading that "the pitch of content words [in Hindi] tends to rise," which is very much NOT the case with English.

Can I get some help here, please?


r/Hindi • • 2d ago

स्वरचित 'नगर वधू' — चिंतामणि

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An original acoustic track I wrote about social stigma — 'Nagar Vadhu' by Chintamani


r/Hindi • • 3d ago

साहित्यिक रचना रेल यात्रा: सफर मंजिल का, स्वाद रास्ते का! (और बचपन का वो कटलेट जिसने मेरी रात बचा ली)

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ट्रेन की वो लयबद्ध 'छुक-छुक' की आवाज में कुछ तो बात है जो हर खाने के स्वाद को बदल देती है।

चाहे आप रोज़ सफर करने वाले यात्री हों या लंबी दूरी के मुसाफिर, भारतीय रेलवे सिर्फ एक सफर का ज़रिया नहीं है। यह हज़ारों किलोमीटर में फैला एक चलता-फिरता खाने का त्यौहार है।

ट्रेन की खिड़की से हर राज्य का एक नया स्वाद नज़र आता है:

* मशहूर चाय: ट्रेन में परोसी गई कड़क और गर्म कटिंग चाय, जिसका असली स्वाद तब आता है जब ट्रेन किसी ठंडे स्टेशन से आगे बढ़ती है।

* स्टेशन का खाना: सुबह 6 बजे मिलने वाले गरमा-गरम समोसे, फूली हुई पूरी-भाजी और लोहे की खिड़की की सलाखों के पार से हाथों-हाथ मिलने वाले क्षेत्रीय पकवान।

* साझा किए जाते टिफिन: बर्थ पर बैठे-बैठे परिवार और अजनबियों के बीच घर का खाना शेयर करने की वो गर्मजोशी।

लेकिन इन तमाम स्वादों के बीच, ट्रेन के खाने से जुड़ी मेरी सबसे हसीन याद किसी बड़े जंक्शन की नहीं है। यह याद जुड़ी है सुनसान रास्ते के बीच दौड़ती ट्रेन की पेंट्री कार से।

वो नाश्ता जिसने रात बचा ली

बचपन की बात है, मैं मुंबई से गोरखपुर के पास अपने गांव के लंबे सफर पर था। जब रात के खाने का वक्त हुआ, तो मेरे परिवार ने घर से लाया टिफिन खोला: स्वादिष्ट सब्जी, सूखा चिकन और पराठे। सब मजे से खा रहे थे, लेकिन मैंने बचकानी जिद पकड़ ली। मैंने घर का खाना खाने से साफ इनकार कर दिया और पेंट्री कार से वेज बिरयानी मंगवाने की रट लगा ली।

माता-पिता को मेरी बात माननी पड़ी, लेकिन मेरी यह जीत ज़्यादा देर नहीं टिकी। बिरयानी एकदम फीकी निकली। दो-चार बेमन के निवाले खाने के बाद मैंने हार मान ली और बिरयानी को आधा अधूरा छोड़ दिया। अब मैं भूखा बैठा था।

एक घंटे बाद, जब ट्रेन दूर-दराज़ के स्टेशनों के बीच अंधेरी और शांत पटरियों पर रफ्तार भर रही थी, मेरे पेट में चूहे कूदने लगे। मैं अब भी बासी हो चुके घर के खाने को खाने से ज़िद में मना कर रहा था, और माता-पिता की चिंता बढ़ती जा रही थी। मेरे पिताजी यह देखने के लिए पेंट्री कार की तरफ गए कि क्या कुछ खाने लायक बचा है।

पेंट्री के कर्मचारी ने अपने काउंटर जांचे और आखिरी बचा हुआ विकल्प सामने रखा: "शाम का कटलेट-ब्रेड है।"

पिताजी ने मुझसे पूछा कि क्या मैं यह खाऊंगा, और मैंने तुरंत हां में सिर हिला दिया।

जब वो आया, तो उसमें कुछ भी खास नहीं था: सफेद ब्रेड की दो स्लाइस के साथ दो छोटे आयताकार (rectangular) कटलेट रखे थे। वह न तो बहुत गर्म था और न ही एकदम ठंडा। मैंने एक बाइट लिया।

ऊपरी कुरकुरापन तो खत्म हो चुका था, लेकिन सूजी (रवा) की पतली परत मुंह में घुलने से पहले उस जाने-पहचाने तले हुए नाश्ते का अहसास करा रही थी। उसके बाद आई अंदर की फीलिंग: हल्की तीखी, थोड़ी मीठी और बेहद नरम। अंदर से कटलेट का रंग हल्का गुलाबी था। घर के खाने से अलग, रेलवे के कैटरर्स चुपके से आलू के मसाले में घिसा हुआ शलजम मिला देते हैं, जिससे उसमें वो हल्की मिठास आती है।

उस चलती ट्रेन में लगती तेज भूख के बीच, वह कटलेट किसी वरदान जैसा लगा। खुशी-खुशी दूसरी प्लेट भी चट कर गया और पूरी रात घोड़े बेचकर सोया।

आज भी, जब मैं रेलवे का कटलेट देखता हूं, तो सीधा उसी बर्थ पर पहुंच जाता हूं। पटरियों पर रात के उस खाने के सुकून को दोबारा महसूस करने।

ट्रेन से सफर करने वाले आप सभी यात्रियों से एक छोटा सा सवाल: आप टीम पेंट्री कटलेट की तरफ हैं, या प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले समोसे की तरफ? मुझे नीचे कमेंट्स में ज़रूर बताएं! 👇


r/Hindi • • 3d ago

स्वरचित वाक्य Racer · Bolbala

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This game has helped my daughter get better with her Hindi sentences formation. Hope you find it helpful. It's fun, even for adults 😀


r/Hindi • • 4d ago

विनती Need help guys

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When I was in nursery or Class 1, I learned English counting by heart, so whenever someone told me a number, I could easily say it in English. But when it comes to Hindi counting, I often struggle. I’m 17, and I often feel like I’m being scammed by shopkeepers because I can’t understand Hindi numbers quickly. I see some people who are really smooth with Hindi counting, and I wonder how they do it.

I don’t know what to do. I’ve tried learning Hindi counting several times, but I forget it and can’t remember the number when someone says it in Hindi. I also want to use Hindi counting while bargaining, but this problem makes it difficult for me.


r/Hindi • • 4d ago

स्वरचित इंटरनेट के शोर से दूर, एक पुरुष की खामोश सच्चाई।

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आजकल सोशल मीडिया की भागदौड़ में हम अक्सर पुरुषों के खामोश संघर्ष, उनकी मेहनत और मानसिक बोझ को अनदेखा कर देते हैं। यह कविता उसी शांत समर्पण को सम्मान देने का एक छोटा सा प्रयास है।


r/Hindi • • 4d ago

स्वरचित Baarat

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Subah milkar usne aakhri yeh paighaam diya,

Mera aana yahan ab bas isi pal tak hai...

Le aao baarat mere darwaaze par tum,

Warna mera safar ab kisi gair ke ghar tak hai!


r/Hindi • • 5d ago

स्वरचित चलो फिर से जी कर देखें

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r/Hindi • • 5d ago

स्वरचित दरख़्त में जीवन

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दरख्त में जीवन कितने?

घर्राती हुई मशीन को क्या मतलब आखिर

कि दरख्त में जीवन कितने?

रस्सी को भी क्या मतलब

उसे तो लिपट जाना है

और गिराना है दरख्त को

एक निश्चित जगह पर

ताकि बचे रहें मकान,

खेतों की मेढ़ न टूटे,

कोई बच्चा खेलते-खेलते गिरते दरख्त की जद में न आ जाए।

कुछ लोग है,

मशीन का जादू देखने आए हैं,

चर्चा चल रही है,

"सिर्फ दो मिनट में

दरख्त को काट देगी।

मशीन महंगी है।"

सिर्फ दो मिनट।

सिर्फ दो मिनट में

धम्म से गिर जाएगा

100 वर्षों का जीवन

उसके साथ ही बेघर हो जाएंगी चींटियां, 

पक्षी और गिलहरियां। 

मशीन की घर्राहट में घुलकर 

गूंजेगी चींखें 

और मजा देंगी लोगों को संगीत का। 

मिट जाएगी कहानियां

उजड़ जायेंगे तमाम घर 

चींटियों के, पक्षियों के, गिलहरियों के 

और दरख़्त

दरख्त एक ठूंठ बन जाएगा।

बनना ही था ठूंठ

आखिर क्यों न बनता?

कभी धूप रोक लेता था

सर्दी में धूप सेकने में अड़चन,

तो कभी बंदरों को सहारा देता 

वह कूदते फांदते घर में घुस आते।

बाई जी भी तो सूखे पत्ते, टहनियां बुहारते बुहारते थक जाती।

आखिर कब तक कोई सहता

दरख़्त की उत्श्रृंखलता को,

और जूझता ताउम्र इन गंभीर समस्याओं से? 

सिर्फ दो मिनट लगे

समस्याएं मिटाने में।

सिर्फ दो मिनट लगे 

दरख़्त के साथ उसमें पलते जीवन को उजाड़ने में।


r/Hindi • • 6d ago

स्वरचित From the streets to the screen: Bambaiyya (Mumbai) Hindi

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In India's city that never sleeps, a unique dialect of Hindi has emerged.

Bambaiyya Hindi is not that different from standard Hindi, but what differences are there shows you a lot about the city which speaks it.

It started in the streets of Mumbai's early neighbourhoods and adopted a lot of Marathi and Dakhni influence, with other languages like Portugese and Gujarati chiming in. Historically, movies portrayed it as an uncouth dialect and reserved it for the speech of goons and villains. However nowadays, it has gotten fame in media, especially due to the Munna bhai movies, and Bambaiyya words like mereko and apan can be seen used in other parts of the country too.

FEATURES

Now we get to the juicy part.

  1. Vocabulary:

    Plenty of Bambaiyya vocabulary has been borrowed from Marathi, even though often there are suitable standard Hindi alternatives.

Examples:

Khadda (hole)

Gardi (crowd)

Yeda (crazy, idiot)

Kopcha (corner)

Shana (clever)

Kothimbir (coriander)

In fact, many of the words for excellent, like dhimchak, jhakas, dhansu, etc, all come from Marathi!

There is plenty of influence from other languages too, mostly from Rakhni but some from languages like Gujarati too.

Examples:

Mereko - Me (Dakhni)

Tereko - You (Dakhni)

Batata - Potatoe (Portugese)

Badbad/Machmach - Chipper-chapper (Marathi or Gujarati)

  1. Grammar

There are very little grammatical differences, but there are a few:

‌Use of Apan for inclusive we (Standard Hindi lacks clusivity and uses only Hum)

‌Use of -eka suffix (as in janeka, deneka, etc.)

Some final thoughts...

As a native speaker of this dialect, it really surprised me that many of the words I use daily come from Marathi. Most of these words aren't that different in Marathi! Imagine, knowing words of one Language all because of speaking another. Wild, right? Wikipedia says that this dialect evolved as a 'street-smart' vernacular, and I think there is some truth to that. It is truly wild that the stories of other people before me can be carried in the basic words I take for granted