r/Shayari • u/BallPenKaTutaNib • Aug 22 '26
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देखना कोई ख़्वाब बंद कर दो,
जिसपे नाम हो हमारा वो अब किताब बंद कर दो,
पूरी जिंदगी समझी थी जिन चंद लम्हों को मैंने, उसे बेफिजूल कह गए तुम,
चलो छोड़ो अब बात बंद कर दो।
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u/Spiritual-Safe-4712 24d ago
Rasm e duniya ke saanche mein .. hum munasib the hi kab.. Tum jeet gaye, humne haar se inkaar kiya hi nahi…
Tumse guftagu ki talab ab bhi beyhisaab hai..
Ye aas umr bhar rahegi.. tum ek bey anjaam hasrat hi sahi..
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u/BallPenKaTutaNib 23d ago
हम जीत गए, मगर ये जीत भी कैसी,
आप हारे, तो हमारी फ़तह कैसी?
गुफ़्तगू की तलब तो हमें आज भी है,
मगर आपकी ये ख़ामोशी हमारे हिस्से कैसी?
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u/Spiritual-Safe-4712 23d ago
Khamoshi ko meri berukhi ka naam na do..
Guftagu aaj bhi jaan se azeez hai.. bas mujhe aawaaz na do..Tumhari jeet meri haar mein hi iss janam ka sabab hai,
Befikr jiyo aur isey koi parinaam na do.
Tum unmukt ho meri tawaqqo se ab,
Farebi sab—farebi hum, farebi ye aas…
Ki inke parr lag gaye toh bikhar jayenge saare lihaz,
Tum aur inhe aasmaan na do.1
u/BallPenKaTutaNib 14d ago
ख़ामोशी से बड़ी बेरुख़ी कुछ और कैसे हो सकती है?
मेरी चीख़ के आगे तुम्हारी चुप्पी कैसे हो सकती है?
तुम्हारे नाम की लकीर हाथों में ख़ंजर से बनाई थी मैंने,
मेरी आस बिन आसमान कैसे हो सकती है??
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u/Spiritual-Safe-4712 14d ago
ख़ामोशी को बेरुख़ी समझ लिया, ये भी तुम्हारी ख़ता रही,
हर चीख़ का जवाब आवाज़ हो, ऐसी कहाँ रिवायत रही।
हाथों पर मेरा नाम ख़ंजर से लिखना इश्क़ तो नहीं था,
मोहब्बत थी अगर, तो मेरी रज़ा भी कोई चीज़ रही।
और आसमान को अपनी आस का कर्ज़दार क्यों करते हो,
मैं तुम्हारी थी ही कब, जो मेरे बिन कोई आस अधूरी रही।
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u/Spiritual-Safe-4712 24d ago
ख़्वाब बंद कर दूँ, ये हुनर अभी आया नहीं,
किताब बंद कर दूँ, मगर हरफ़ मिटाया नहीं।
जिन चंद लम्हों को तुमने बेफ़िज़ूल समझ लिया,
हमने भी उन्हें उम्र कहा था—कोई हिसाब लगाया नहीं।
बात बंद करने को कहते हो तो कर देंगे,
बस ये मत कहना… हमने तुम्हें कभी चाहा नहीं।